मानसून से पहले देहरादून प्रशासन अलर्ट मोड में है। प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने आपदा प्रबंधन, जलभराव, भूस्खलन और पुनर्वास कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए।
देहरादून। उत्तराखंड में मानसून की दस्तक से पहले देहरादून जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। प्रमुख सचिव एवं जनपद प्रभारी डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने गुरुवार को जिला कार्यालय सभागार में आयोजित बैठक में मानसून पूर्व तैयारियों, आपदा प्रबंधन व्यवस्थाओं और पुनर्वास कार्यों की विस्तृत समीक्षा की।
बैठक में जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने जनपद में संवेदनशील स्थलों, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों, जलभराव प्रभावित इलाकों तथा आपदा शमन कार्यों की प्रगति की जानकारी दी। प्रमुख सचिव ने निर्देश दिए कि मानसून शुरू होने से पहले सभी लंबित सुरक्षा एवं राहत कार्य प्राथमिकता के आधार पर पूरे किए जाएं।

जलभराव और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों पर विशेष फोकस
बैठक में बताया गया कि जिले में जलभराव से निपटने के लिए 39 डी-वॉटरिंग पंप तैयार रखे गए हैं। आईएसबीटी क्षेत्र में जलनिकासी की समस्या के समाधान के लिए एमडीडीए, नगर निगम, सिंचाई विभाग, लोक निर्माण विभाग और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम गठित करने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा जनपद के 169 नालों में से 153 की सफाई पूरी कर ली गई है, जबकि शेष नालों पर कार्य जारी है। 12 प्रमुख नालों की सफाई और सुधार कार्यों को तेजी से पूरा करने के निर्देश भी दिए गए।
12 लैंडस्लाइड जोन और क्लाउड बर्स्ट क्षेत्रों की निगरानी
प्रमुख सचिव ने जिले में चिन्हित 12 भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों (लैंडस्लाइड जोन) और क्रॉनिक स्लिप जोन की समीक्षा करते हुए संवेदनशील इलाकों में स्थायी समाधान विकसित करने पर जोर दिया। किमाड़ी सहित कई क्षेत्रों के लिए दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए। साथ ही क्लाउड बर्स्ट संभावित क्षेत्रों में निगरानी और पूर्व चेतावनी तंत्र को और अधिक मजबूत बनाने को कहा गया।

73 दूरस्थ गांवों की गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष व्यवस्था
बैठक में जानकारी दी गई कि जिले के 73 ऐसे गांव चिन्हित किए गए हैं जहां मानसून के दौरान संपर्क व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इन क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं को समय से पहले नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराने की व्यवस्था की गई है। उनके साथ आने वाले परिजनों के भोजन और अन्य सुविधाओं की जिम्मेदारी भी प्रशासन द्वारा उठाई जाएगी।
89 संवेदनशील स्कूलों की पहचान
मानसून के दौरान नदी-नालों से प्रभावित होने वाले 89 स्कूलों को चिन्हित किया गया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि इन स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक व्यवस्थाएं तैयार रखी जाएं।

डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया पर भी नजर
स्वास्थ्य विभाग को डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी वेक्टर जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए व्यापक अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। नियमित फॉगिंग, जनजागरूकता कार्यक्रम और जलभराव वाले स्थलों की निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया गया।
कार्लीगाड़ और माझाड़ा पुनर्वास कार्यों का निरीक्षण
समीक्षा बैठक के बाद प्रमुख सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान और अन्य अधिकारियों के साथ कार्लीगाड़ और माझाड़ा क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने पुनर्वास कार्यों, नदी चैनलाइजेशन और आपदा सुरक्षा उपायों का जायजा लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
24×7 सक्रिय रहेगा आपदा नियंत्रण कक्ष
प्रमुख सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि मानसून के दौरान जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का वार रूम और कंट्रोल रूम 24 घंटे सक्रिय रहे। उन्होंने कहा कि किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया, राहत और बचाव कार्यों में समन्वय तथा पूर्व चेतावनी तंत्र की प्रभावी कार्यप्रणाली सुनिश्चित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।

