IMG 20210306 210020 944

शनिवार 6 मार्च का दिन उत्तराखंड में सियासी चर्चाओं से भरा रहा। एक तरफ गैरसैंण में चल रहा बजट सत्र स्थगित हुआ तो दूसरी तरफ भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व से प्रदेश प्रभारी सहित ऑब्जर्वर पहुंचे तो लोगों ने कयासबाजी शुरू कर दी लेकिन अंदर की बात क्या है उसका सटीक विश्लेषण जानिए।

Rumors of change Chief Minister in Uttarakhand
img 20210306 210021 1811398072452630285713

यह पहली दफा नहीं हुआ है जब उत्तराखंड में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर सियासी गलियारों में भूचाल आया हो मौजूदा त्रिवेंद्र सरकार के पहले साल से लेकर अब पांचवा साल शुरू होने जा रहा है लेकिन इस बीच कई बार इस तरह की खबरों ने सुर्खियां पकड़ी और वह औंधे मुंह गिरी ऐसा ही कुछ शनिवार 6 मार्च को भी हुआ जब भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह और प्रदेश प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम अचानक देहरादून आ धमके और कुछ ही घण्टों में कोर ग्रुप की बैठक बुलाई गई। लेकिन शाम होते मुख्यमंत्री के बदलने की सभी चर्चाएं धराशायी हो गई जब कोर ग्रुप की बैठक के बाद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने अपने बयान में सब कुछ सामान्य होने की बात कही।

नही होना था नेतृत्व परिवर्तन

img 20210306 210021 0456485899191092509218

प्रदेश में शनिवार सुबह से ही मुख्यमंत्री के बदलने को लेकर अफवाहों का बाजार गर्म हुआ। हालांकि यह स्पष्ट था कि अगर मुख्यमंत्री को बदलने जैसी कोई बात होती तो मुख्यमंत्री को बुलाया नहीं जाता बल्कि सीधे जिस को मुख्यमंत्री बनाना था उसे देहरादून भेजा जाता। इसके अलावा मुख्यमंत्री बदलाव की स्थिति में समर्थकों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के साथ विपक्ष की गतिविधियां भी तेज हो जाती। लेकिन ऐसा कुछ नहीं था जिससे स्पष्ट हो गया था कि मुख्यमंत्री को बदलने को लेकर तो कम से कम कोई विषय नहीं है। और यही बात शाम होते होते कोर ग्रुप की बैठक के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत का जब आधिकारिक बयान बाहर आया तो साबित भी हो गई।

बजट सत्र के स्थगित होने से कोर ग्रुप की बैठक का कोई सम्बन्ध नही।

img 20210306 wa00173837294382020901005

ज्यादातर लोगों द्वारा गैरसैंण में चल रहे बजट सत्र के स्थगित होने को भाजपा की कोर ग्रुप की बैठक के साथ जोड़कर देखा गया। और यह माना गया कि अचानक हुई भाजपा की इस बैठक के चलते मुख्यमंत्री को तत्काल बुलाया गया और इसी वजह से बजट सत्र को स्थगित करवाया गया, जबकि ऐसा नहीं है। दरअसल बजट सत्र को आज स्थगित होना है यह कार्य मंत्रणा की बैठक में पहले ही तय कर दिया गया था। यानी कि गैरसैंण में चल रहा बजट सत्र का स्थगित होना एक सामान्य प्रक्रिया थी जो कि पहले से तय की गई थी। इससे भाजपा कोर ग्रुप की बैठक का कोई संबंध नहीं है। लेकिन बात यहीं पर खत्म नहीं होती है। ऐसे अचानक प्रदेश में भाजपा के बड़े नेताओं की सरप्राइज विजिट नेतृत्व परिवर्तन पर भले ही संकेत ना दे लेकिन कुछ तो संकेत दे दिए हैं। सवाल यह उठता है कि अगर सब कुछ सामान्य है तो अचानक झारखंड से ऑब्जर्वर और प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम उत्तराखंड कैसे आ धमके और इस पूरे घटनाक्रम को क्यों ना असामान्य घटना माना जाए जिसके पीछे कई सवाल खड़े होते हैं।


गैरसैंण में हुए लाठीचार्ज पर सबकी नजर

screenshot 20210301 190959 powerdirector855835398741338848

बजट सत्र के पहले दिन गैरसैंण में ग्रामीण और महिलाओं पर हुए लाठीचार्ज अपने आप में एक अभूतपूर्व घटनाक्रम था। जिसको लेकर पूरे प्रदेश में सरकार को किरकिरी झेलनी पड़ी। हालांकि मुख्यमंत्री द्वारा इस घटना के तत्काल ही मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए गए। लेकिन इसके बावजूद भी यह घटना कैसे घटित हो गई वह भी पहाड़ जैसे शांत इलाकों में जहां पर इस तरह की घटना पहले कभी नहीं हुई है। यह अपने आप में एक बड़ा सवाल खड़े करता है। सूत्रों की माने तो गैरसैंण में हुए लाठीचार्ज पर केंद्र ने आपत्ति दर्ज की है। बताया जा रहा है कि दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन जैसे बड़े आंदोलन में भी लाठी चार्ज नहीं किया गया लेकिन गैरसैंण जैसे छोटे और संवेदनशील विषय पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किया जाना सवालों के कटघरे में खड़ा करता है। जानकारों के मुताबिक लाठीचार्ज के प्रक्रिया में कई मानक पूरे करने होते हैं और लाठीचार्ज एक अंतिम विकल्प होता है और जिस तरह से गैरसैंण में लाठीचार्ज हुआ वह कहीं ना कहीं एक बड़ी लापरवाही को दर्शाता है। सूत्रों के अनुसार कोर ग्रुप की बैठक में इस विषय पर चर्चा की गई और हो सकता है कि आने वाले कुछ दिनों में इस मामले पर बड़ी कार्रवाई देखने को मिले।

मंत्रिमंडल विस्तार अगर हुआ तो दिल्ली से आएगा फरमान

img 20210306 210021 136608777693346138443

इसके अलावा एक चर्चा और है जो कि मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर है। इसको लेकर भी कई कयास लगाए जा रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर जिन लोगों का नाम सामने आया है उन्होंने मंत्री पद लेने से इनकार कर दिया है जो कि पूरी तरह से अव्यावहारिक तथ्य नजर आता है। भाजपा जैसे व्यवस्थित संगठन में कोई विधायक मंत्री पद ठुकरा दें यह बात गले नहीं उतरती है। तो वहीं आने वाले 2022 के चुनाव से पहले किसी विधायक को मंत्री पद मिलना उसकी विधानसभा में उसको माइलेज देने में ही काम करेगा, तो यह बात तो सिरे से खारिज हो जाती है कि किसी विधायक द्वारा मंत्रिमंडल पद को लेकर मना किया गया होगा। तो वही अगर कोर ग्रुप की बैठक में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर कोई राय बनी होगी तो इसका असर आगामी कुछ दिनों में अचानक होने वाले आदेशों से सामने आएगा जो कि दिल्ली से तय होगा। इस बारे में कोर ग्रुप की बैठक के बाद बैठक में शामिल किसी पदाधिकारी द्वारा नहीं बताया जा सकता है।