नई आबकारी नीति से व्यापारियों में असमंजस, क्या हो पाएगी कोविड से हुए नुकसान की भरपाई।

पिछले साल राजस्व के लिहाज से सबसे ज्यादा नुकसान का अनुमान शराब व्यपार में लगाया जा रहा है ऐसे में शराब व्यापारी सरकार की नई अबकारी नीति पर टकटकी लगाए थे लेकिन शनिवार को आई संशोधित आबकारी नीति से व्यापारी असमंजस की स्थिति में हैं।

मोजूदा भाजपा सरकार में तीसरी बार आबकारी नीति में बदलाव किया गया है, बहरहाल बीते साल में कोविड और लॉकडाउन से हुए नुकसान से अब उभरने की उम्मीद में व्यापारियों ने सरकार से उम्मीद लगाई हुई थी कि शायद कुछ राहत दी जाएगी। शनिवार को कैबिनेट में संशोधित अबकारी नीति को मंजूरी मिली जिसमे कई नए बदलाव किए गए है।

क्या कहती है नई आबकारी नीति—

बदली हुई आबकारी नीति के अनुसार अब दो वर्षों के लिए शराब की दुकानों का आबंटन ई टेंडरिंग के माध्यम से होगा तो वहीं सभी दुकानों का राजस्व नए सिरे से तय होगा और दुकानों में बचा हुआ स्टॉक विभाग को हैंडओवर किया जाएगा। टेंडर के लिए आवेदन शुल्क भी बड़ा कर 40 हजार से 50 हजार किया गया है। इस बार भी देशी शराब की दुकान में बीयर की बिक्री की अनुमति दी गयी है। शराब की दुकानों को खोलने का समय भी सुबह 10 बजे से शाम 10 बजे तक निर्धारित किया गया है।

क्या कहते हैं शराब व्यापारी–

शनिवार को कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक द्वारा फौरी तौर पर दी गई नई आबकारी नीति की जानकारी को लेकर शराब व्यापारी अभी कन्फ्यूजन की स्थिति में है। कुछ शराब व्यापारियों को लगता है कि सरकार ने आबकारी नीति में कुछ बेहतर बदलाव किए हैं तो वहीं कुछ व्यापारियों का कहना है कि इस संशोधित आबकारी नीति को लेकर वस्तुस्थिति शासनादेश जारी हो जाने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी। साथ ही व्यापारियों का यह भी कहना है कि 2 साल तक होने वाली ई टेंडरिंग से नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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