विधानसभा शीतकालीन सत्र : सदन में बताई जा रही जनरल बिपिन रावत के शौर्य की कहानियां, आप भी जाने | Tribute to late Bipin Rawat

गुरुवार से शुरू हुये विधानसभा सत्र के शीतकालीन सत्र का पहला दिन जनरल बिपिन रावत के नाम किया गया है। आज सदन का पूरा समय शहीद हुए सैनिकों और CDS बिपिन रावत को श्रद्धांजलि के निमित रखा गत है और सभी अपनी सम्वेदनाएं और जनरल बिपिन रावत से जुड़ी शौर्य के किस्से सदन में साझा कर रहे हैं।

First day of Uttarakhand winter session, tribute is being paid to late Bipin Rawat in the House

उत्तराखंड विधानसभा शीतकालीन सत्र का पहला दिन

सत्र के पहले सदन में जनरल बिपिन रावत को श्रद्धांजलि दी जा रही है। सबसे पहले नेता सदन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने निधन पर शोक पढ़ना किया शुरू। सीएम धामी ने सीडीएस जनरल विपिन रावत से जुडी यादों को सदन में साझा किया और कहा कि जनरल रावत ने हमेशा सेना का मनोबल बढ़ाने का काम किया है। CM धामी ने कहा जनरल सहाब हमेशा हमारे दिलों में रहेंगे

सदन में सभी सदस्य जनरल बिपिन रावत से जुड़े यादें उनकी स्मृतियां और उनके शौर्य की कहानी किस्सों का साझा किया गया। तो वहीं पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने भी जनरल बिपिन रावत से जुड़े कई किस्से कहानी और उनके शौर्य की कहानी साझा की। पूर्व सीएम ने आखिर में यह कह कर अपना सम्बोधन खत्म किया कि “बढ़े गौर से सुन रहा था जमाना, आप ही सो गए दास्तां कहते कहते”


सदन में CDS विपिन रावत के साथ साथ उनके साथ दुघर्टना में मृतक सैनिकों को भी सदन ने श्रद्धांजलि दी। उप नेता प्रतिपक्ष करन मेहरा ने कहा उनके नेतृत्व में भारत की सेना ने नए आयाम बनाने का काम किया। म्यामांर व पाकिस्तान में आतंकवादी केम्पों में बिपिन रावत जी नेतृत्व में हुई सर्जिकल को कोई नहीं भूल सकता। CDS बिपिन रावत की देश सेवा अविस्मरणीय है। उनके आकस्मिक निधन से राष्ट्र को जो क्षति हुई है उसकी क़भी पूर्ति नहीं की जा सकती है।

संसदीय कार्यमंत्री बंशीधर भगत ने कहा महान योजनाकार थे जनरल बिपिन रावत। प्रधानमंत्री जी के निकट रहकर जो अहम सलाहें उन्होंने रक्षा के क्षेत्र में दी हैं वह देशहित में महत्वपूर्ण रही हैं। CDS विपिन रावत के आकस्मिक निधन पर मदन कौशिक ने कहा कि जनरल रावत ने गुलाम कश्मीर को लेकर कहा था वह कश्मीर का हिस्सा है। सीजफायर को लेकर उन्होंने कई बार पाकिस्तान को चेतावनी दी कि उसे भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होने कहा जनरल अचूक रणनीतिकार थे। तालिबान को लेकर भी उन्होंने रणनीति पहले ही तैयार कर ली थी। विपिन रावत के देश हित मे लिए गए निर्णयों को कोई भूल नही सकता। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड से उनका बड़ा लगाव था, यह विपिन रावत की थी जन्मभूमि भी थी और क्रम भूमि भी।

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सदन में कहा गया कि बिपिन रावत के जाने से पूरे राज्य में शोक के लहर है, देश के लिए बड़ी क्षति है। सैनिक कल्याण मंत्री ने इच्छा जताई कि सैन्यधाम या राज्य की यूनिवर्सिटी का नाम जनरल बिपिन रावत के नाम पर रखा जाय।

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