चमोली आपदा : SDRF की 13 टीमें रेस्क्यू पर, 32 शव बरामद। SDRF ने की ब्लॉक टनल की मैपिंग।

चमोली आपदा को आये आज तीसरा दिन है और अभी भी बचाव और राहत का काम जोशीमठ क्षेत्र में धौली गंगा नदी और आसपास के प्रभावित क्षेत्रों में लगातार जारी है। तपोवन एनटीपीसी पावर प्रोजेक्ट की एक टनल के अंदर फसे 33 लोगों को अभी भी लगातार रेस्कयू करने का काम जारी है।

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32 शव रिकवर, ब्लॉक सुरंग की 60 मीटर खुदाई बाकी।

मंगलवार को पूरे दिन चले रेस्क्यू अभियान की ताजा हालातों की जानकारी देते हुए एसडीआरएफ के डीआईजी रिद्धिम अग्रवाल ने बताया कि अब तक कुल 32 शव बरामद किए जा चुके हैं जिनमें से 7 लोगों की शिनाख्त भी की जा चुकी है। जिसमे 4 व्यक्ति ऋषिगंगा प्रोजेक्ट में काम करने वाले और 3 लोग ऋत्विक कम्पनी के मालूम हुए हैं। SDRF से मिली ताजा जमकारी के अनुसार रेस्क्यू के मुख्य बिंदु तपोवन में एनटीपीसी प्रोजेक्ट की टनल में लगातार मलवा हटाने का काम जारी है और अब तक डेढ़ सौ मीटर तक मलवा साफ किया गया है लेकिन अभी 60 मीटर और अंदर खुदाई की जरूरत है। डीआईजी एसडीआरएफ रिद्धिम अग्रवाल ने बताया कि जैसे-जैसे टनल में खुदाई अंदर तक की जा रही है मलवा और ज्यादा मात्रा में चुनौती बनता जा रहा है लेकिन इसके बावजूद भी एसडीआरएफ की टीम लगातार बचाव कार्य में लगी हुई है।

SDRF की 13 अलग-अलग टीमें निकली है मिशन पर।

एसबीआई डीआईजी एसडीआरएफ अग्रवाल ने बताया कि चमोली आपदा को लेकर एसडीआरएफ ने अपनी 13 अलग-अलग टीम गठित की है। जिनमें से 6 टीमें जोशीमठ से श्रीनगर तक अंडर वॉटर सर्च रेस्क्यू का काम रही है जिसमें SDRF की टीम नदी में जाकर, कई अत्याधुनिक तकनीकों से लैस राफ्ट और अंडर वाटर सुनार के जरिए शवों को ढूंढने का काम किया जा रहा है।इसके अलावा 3 टीमें आसपास के प्रभावित गांवों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों से मिलकर राहत के साथ साथ गुमशुदा लोगों का डाटा संकलन कर रही है। SDRF की 1 टीम द्वारा आज जिपलाइन बनाकर रैणी गांव सहित मोटर पुल टूट जाने से जिन गांवों का सम्पर्क टूट गया है वंहा केम्प किया गया और गांव में तमाम जरूरतों को पूरा किया गया। तो वहीं इसके अलावा SDRF की 3 टीमें ऋषिगंगा प्रोजेक्ट से लेकर तपोवन एनटीपीसी प्रोजेक्ट तक मलबे में शवों को ढूंढने का काम कर रही है, जिसमें 4 डॉग स्कोर्ट भी शामिल है।

जियोग्राफिकल मैपिंग से जल्द स्पष्ट होगी स्थिति।

उत्तराखंड एसडीआरएफ द्वारा तपोवन एनटीपीसी पावर प्रोजेक्ट की टनल में रेस्क्यू को लेकर ज्योग्राफिकल मैपिंग के लिए आज CSIR संस्थान के साथ मिल कर आज श्रीनगर से एक हेलीकॉप्टर को उड़ाया गया जिसने तपोवन ब्लॉक टनल की पूरी तरह से मैपिंग की और उसके बाद यह गोचर में लेंड हुआ।

रिद्धिम अग्रवाल ने बताया कि CSIR का जियोग्राफिकल मैपिंग इक्यूपमेंट श्रीनगर में ही मौजूद था और जोशीमठ तपोवन क्यों कि उड़ान के लिए प्रतिबंधित है इसलिए कल ही DGCA से अनुमति ले ली गयी थी और आज ब्लॉक टनल की मैपिंग कर के टनल के अंदर मलवे और पानी की वास्तविक स्थिति का आंकलन किया गया जिसको लेकर वेज्ञानिको अभी विश्लेषण में लगें है और कल सुबह तक स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

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