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उत्तराखंड में 7,000 बीघा सरकारी जमीन बेचने के आरोपों पर प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने स्थिति साफ की। जानें UIIDB के लैंड बैंक, पटवाडांगर लीज और ऋषिकेश PWD के PPP मॉडल का पूरा गणित।
देहरादून (विशेष रिपोर्ट): उत्तराखंड में ‘उत्तराखंड इंफ्रास्ट्रक्चर एंड इन्वेस्टमेंट डेवलपमेंट बोर्ड’ (UIIDB) की कार्यप्रणाली, लैंड बैंक प्रबंधन और 7,000 बीघा सरकारी जमीन निजी हाथों में सौंपने के आरोपों को लेकर गरमाई राजनीति के बीच प्रदेश सरकार की ओर से स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी गई है। विपक्षी दलों द्वारा लगाए जा रहे गंभीर आरोपों पर विराम लगाते हुए प्रदेश के प्रमुख सचिव (नियोजन) एवं UIIDB के प्रबंध निदेशक (MD), वरिष्ठ IAS अधिकारी आर. मीनाक्षी सुंदरम ने खास बातचीत में उठ रहे तमाम संशयों का बिंदुवार और तथ्यात्मक जवाब दिया है। प्रमुख सचिव ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य राज्य की परिसंपत्तियों का व्यापार करना नहीं, बल्कि प्रदेश के सीमित संसाधनों का अधिकतम और नियोजित उपयोग (Optimal Utilisation) करके राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।

7,000 बीघा जमीन का विवाद: भ्रामक दावों का सच और वास्तविक धरातल

आर. मीनाक्षी सुंदरम ने 7,000 बीघा जमीन किसी भी निजी कंपनी को देने या कौड़ियों के दाम बेचने के दावों को पूरी तरह “काल्पनिक, भ्रामक और सत्य से परे” बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी दस्तावेजों में ऐसे किसी भी प्रस्ताव का अस्तित्व नहीं है।
  • वास्तविक लैंड बैंक: UIIDB के पास वर्तमान में महज 45 एकड़ (लगभग 18 हेक्टेयर या करीब 225 बीघा) जमीन ही विभिन्न विभागों से हस्तांतरित होकर आई है।
  • निविदाएं (Bids): इस 45 एकड़ भूमि में से भी बोर्ड ने अब तक केवल 10 से 12 एकड़ भूमि पर ही विकास कार्यों के लिए मात्र 3 निविदाएंजारी की हैं।
  • मांगरा (मगरो) प्रोजेक्ट का सच: एडवेंचर टूरिज्म विकसित करने के लिए शुरुआती चरण में मांगरा क्षेत्र में भूमि चिह्नित की गई थी। लेकिन, राजस्व रिपोर्ट में जब यह सामने आया कि संबंधित भूमि ‘फॉरेस्ट लैंड’ (वन भूमि) के दायरे में आ सकती है, तो पारदर्शी नीति के तहत उस प्रस्ताव को तत्काल निरस्त कर दिया गया।

UIIDB का गठन: पंजाब और गुजरात मॉडल से प्रेरणा

उत्तराखंड में बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश को आकर्षित करने और रुकी हुई परियोजनाओं को गति देने के लिए एक अधिकार संपन्न संस्थागत व्यवस्था की जरूरत थी। पूर्व मुख्य सचिव डॉ. एस. एस. संधू पंजाब और गुजरात के सफल इंफ्रास्ट्रक्चर बोर्ड मॉडल की अवधारणा उत्तराखंड लाए।
[UIIDB गठन की टाइमलाइन]
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├── 2022 : 'ऑप्टिमल लैंड यूटिलाइजेशन कमेटी' का गठन
├── 2023 : उत्तराखंड विधानसभा द्वारा 'UIIDB अधिनियम' पारित
├── 2024 : पदों के सृजन और बोर्ड का औपचारिक संचालन शुरू
└── 2025-26 : PPP व लीज मॉडल पर पारदर्शी निविदाएं और पूर्ण संचालन

पर्वतीय vs मैदानी जिलों में आर्थिक खाई को पाटने का प्रयास

राज्य के 13 जिलों में से अधिकांश जिले पर्वतीय हैं, जहां पर्यावरण नियमों और कठिन भू-भाग के कारण बड़े कारखाने या भारी उद्योग लगाना संभव नहीं है। इसके परिणामस्वरूप राज्य में एक गहरी आर्थिक असमानता पैदा हो चुकी है।

GSDP Disparity (आर्थिक असमानता):

  1. मैदानी जिलों का वर्चस्व: उधम सिंह नगर और हरिद्वार का राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) में 50% से 55% योगदान है। देहरादून जोड़ने पर केवल इन 3 मैदानी जिलों का हिस्सा 70% से 75% हो जाता है।
  2. पर्वतीय जिलों की स्थिति: शेष 10-11 पर्वतीय जिलों का संयुक्त योगदान केवल 20% से 25% है।
  3. UIIDB का रणनीतिक लक्ष्य: पर्वतीय क्षेत्रों में कारखानों के बजाय इको-फ्रेंडली सर्विस सेक्टर (वेलनेस सेंटर, आयुष धाम, हाई-एंड टूरिज्म, रिसॉर्ट्स, वेडिंग डेस्टिनेशन) को बढ़ावा देना, ताकि अगले 5 वर्षों में राज्य की GSDP को दोगुना (2x) किया जा सके और 2047 तक ‘विकसित उत्तराखंड’ का लक्ष्य पूरा हो सके।

लैंड मोनेटाइजेशन और PPP मॉडल: मालिकाना हक सदैव सरकार के पास

प्रबंध निदेशक ने स्पष्ट किया कि परिसंपत्तियों के निष्पादन में भूमि या भवन का मालिकाना हक (Ownership Right) कभी भी निजी कंपनी को ट्रांसफर नहीं होता, बल्कि यह शत-प्रतिशत राज्य सरकार के पास ही सुरक्षित रहता है:

1. लैंड मोनेटाइजेशन मॉडल (नैनीताल का पटवाडांगर मामला)

  • नैनीताल स्थित पटवाडांगर की खाली जमीन को बेचा नहीं जा रहा है। इसे गैर-कृषि व्यावसायिक दर पर 90 वर्षों की लीज पर दिया जा रहा है।
  • सरकार का मालिकाना हक बरकरार रखने के लिए सख्त लीज एग्रीमेंट और सालाना लीज रेंट (Annual Lease Rent) का प्रावधान रखा गया है।
  • बड़े भूखंड पर एक एकल निवेशक न मिलने के कारण इसे दो प्रीमियम रिसॉर्ट्स के लिए दो हिस्सों में विभाजित किया गया, जिससे सर्किल रेट कागजों पर दो भागों में बंट गया।

2. PPP मॉडल (हरिद्वार अलकनंदा और ऋषिकेश PWD गेस्ट हाउस)

  • हरिद्वार अलकनंदा गेस्ट हाउस: इसे बेचा नहीं जा रहा, बल्कि 60 वर्षों के कंसेशन पीरियड पर PPP मोड पर चलाने के लिए दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार ने भी अपने भागीरथी होटल को इसी तर्ज पर PPP मॉडल पर दिया है।
  • ऋषिकेश PWD गेस्ट हाउस: जर्जर PWD गेस्ट हाउस को 60 साल के कंसेशन एग्रीमेंट के तहत निजी डेवलपर अपने खर्च पर अपग्रेड और संचालित करेगा। मूल विभाग (PWD) ही ‘कंसेशनिंग अथॉरिटी’ बना रहेगा और अवधि समाप्त होने पर अपग्रेटेड संपत्ति पुनः बिना किसी वित्तीय देनदारी के सरकार को वापस मिल जाएगी।

राज्य को होने वाले वित्तीय और भौतिक लाभ का गणित

सार्वजनिक संपत्तियों के इस योजनाबद्ध इस्तेमाल से उत्तराखंड सरकार और जनता को मिलने वाले लाभों का विवरण नीचे दिया गया है:
परियोजना पहलूऋषिकेश PWD गेस्ट हाउस प्रोजेक्ट आंकड़े
अनुमानित GST राजस्व (60 वर्ष)₹4,600 करोड़ (केंद्र व राज्य सरकार हेतु)
निजी निवेश100% (निर्माण व अपग्रेडेशन खर्च डेवलपर का)
VVIP सुइट्स सुविधा4 लग्जरी सुइट्स जीवनभर राजकीय अतिथियों हेतु 100% मुफ्त (आवास व भोजन)
रोजगार सृजन450 प्रत्यक्ष (Direct) + 700 अप्रत्यक्ष (Indirect) नौकरियां

ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए समानांतर प्रोत्साहन नीतियां

प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने जोर देकर कहा कि सरकार का मूल मंत्र ‘समावेशी विकास’ है। UIIDB जहां बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को संभाल रहा है, वहीं आम नागरिकों और पर्वतीय किसानों के लिए समानांतर योजनाएं संचालित हैं:
  • कृषि व बागवानी: सघन सेब उत्पादन हेतु ‘हाई-डेंसिटी एप्पल पॉलिसी’, ‘कीवी प्रोत्साहन नीति’, ‘मिलेट (श्री अन्न) मिशन’ और ‘एरोमा मिशन’।
  • पर्यटन व स्वरोजगार: ग्रामीण क्षेत्रों के लिए ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय गृह आवास (होमस्टे) विकास योजना’ और बंजर भूमि पर सोलर प्लांट लगाने के लिए ‘मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना’।