प्रधानमंत्री के प्रदेश में आते ही अंधेरे में जा सकता है उत्तराखंड |
PM Modi Uttarakhand Visit

विभागीय मंत्री के कर्मचारियों को दो टूक चेतावनी देने के बाद भी ऊर्जा विभाग के कर्मचारियों की हड़ताल ने अब राज्य सरकार की नाक में दम कर दिया है अब डर इस बात का है कि 7 तारीख को जब प्रधानमंत्री उत्तराखंड में आएंगे तो क्या प्रदेश मे अंधेरे की लहर छाई रहेगी ।

UPCL workers warned of blackout during Prime Minister Narendra Modi’s visit to Uttarakhand

7 तारीख को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उत्तराखंड दौरा है जिसको लेकर सरकार भरसर तैयारियों में जुटी हुई है कहीं किसी तरीके की स्वागत में कमी ना रहे , किसी सरकारी विभाग में काम को लेकर कोई कोताही न बरती जाए आजकल इसका विशेष ध्यान राज्य सरकार रख रही है । लेकिन सरकार का ही  एक विभाग ऐसा है जिसने राज्य सरकार को डर के अंधेरे में डाल दिया है
उत्तराखंड में प्रधानमंत्री के दौरे से पहले ऊर्जा कर्मचारियों ने प्रदेश भर में अंधेरा करने की तैयारी कर ली है. राज्य में 6 अक्टूबर से ऊर्जा कर्मचारी हड़ताल पर जा रहे हैं. 7 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ऋषिकेश दौरा प्रस्तावित है. बड़ी बात यह है कि हड़ताल को दबाने की कोशिशों में जुटा प्रबंधन कर्मचारियों को हड़ताल खत्म कराने में अब तक नाकामयाब रहा है, जबकि विभागीय मंत्री ने भी कर्मचारियों को दो टूक चेतावनी दे दी है

उत्तराखंड में ऊर्जा कर्मचारियों की हड़ताल को लेकर सरकार और ऊर्जा निगम तमाम प्रयास करने का दावा कर रही है, लेकिन आज सचिव ऊर्जा सौजन्य के एक पत्र ने ऊर्जा निगम प्रबंधन पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. दरअसल, ऊर्जा सचिव ने निगम के एमडी दीपक रावत और संदीप सिंघल को पत्र लिखकर निगम द्वारा कर्मचारियों की मांगें पूरी किए जाने के लिए कितना व्यय भार आयेगा, साथ ही अभी बातचीत किस स्तर तक पहुंची है, इन तमाम जानकारियों को नहीं दिए जाने की बात कही है।

जाहिर है कि ऊर्जा सचिव ने कर्मचारियों की मांगों पर इतने समय बाद भी शासन को जानकारी नहीं देने की बात कहकर निगम प्रबंधन के हड़ताल को तुड़वाने की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. यही नहीं विभागीय मंत्री के निर्देशों के अनुसार निगम प्रबंधन को इन कर्मियों की मांगों को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए कहा गया था. लेकिन इसके बावजूद भी यदि अब तक यानी चिट्ठी लिखे जाने तक शासन को की जानकारी नहीं दी गई.
इस मामले पर कर्मचारी नेता कहते हैं कि सरकार आंदोलन को दबाने का काम कर रही है. कर्मचारियों की मांगों को माने जाने की दिशा में कोई काम नहीं हुआ है. ऐसे में यदि कर्मचारियों का शोषण किया जाता है या फिर उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई की जाती है तो उत्तराखंड ही नहीं देश भर के उर्जा कर्मचारी गिरफ्तारियां देने को तैयार हैं।

मामले में जहां अब निगम प्रबंधन की खामियां सामने आने लगी हैं, वहीं विभागीय मंत्री हरक सिंह रावत ने कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने को लेकर कर्मियों को चेतावनी भी दे दी है. हरक सिंह रावत ने कहा यदि कर्मचारी उनकी चुप्पी को डर मान रहे हैं, तो ऐसा सोचना गलत है. हरक सिंह रावत ने कहा इस तरह अचानक कर्मचारियों की मांगों को पूरा नहीं किया जा सकता. अधिकतर मांगों पर निर्णय ले लिया गया है. फिर भी कुछ मांगों के लिए हड़ताल होती है तो यह गलत होगा.

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