Uttarakhand Handicrafts

Surili is a fearless, strong woman residing in the beautiful hills of Uttarakhand Handicrafts. She is a celebration of the beautiful spirit of the very hard working. pahadi women. Made out of “Bhimal”, A local grass and upcycled waste fabric, each doll is handcrafted by local women with love.

“Suruli” सुरीली
Uttarakhand bhimal product Surili doll 1

“सुरीली” दरअसल एक उम्मीद है। उम्मीद देवभुमी के ग्रामीण अंचलों में बसी उन माताओं बहनों की, जिन्होंने सदियों से अपनी परंपरा और स्थानीय उत्पादों को आज तक बचा के रखा है। “सुरीली” वही हिम्मती है जिसने उन माताओं बहनों की उम्मीद दी है। Uttarakhand Handicraft

दरअसल “सुरीली” भीमल से बनी है। वही भीमल जिसे सदियों से उत्तराखंड की माताएं प्रयोग में ला रही हैं। उत्तराखंड की हमारी माताओं ने प्लास्टिक नही बल्कि भीमल के natural fibre की रस्सी को हमेशा घास, लकड़ी और तमाम अन्य उपयोग में लाया है। लेकिन इसके बावजूद भी पहाड़ की उस माँ को आज तक उसके हुनर और पर्यावरण सरक्षण का वाज़िब दाम नही मिल पाया। लेकिन अब लगता है कि यह “सुरीली” गुड़िया हमारी माताओं को भीमल के सरंक्षण और भीमल से बनने वाले नेचुरल फाइबर का उचित दाम दिला पाएगी।

Uttarakhand Handicrafts

देवभूमि उत्तराखंड की धरती में संजीवनी बूटी से लेकर हिमालयी औषधियों की भरमार है बस जरूरत है कि हनुमान जैसे हम इसको पहचान पाए। लेकिन आदि काल से चली आ रही उत्तराखंड की परंपराओं में प्राकृतिक संसाधनों का इतिहास बेहद पुराना है। आज भी अगर हम उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों में पुराने बुजुर्गों से मिल कर उनके दौरे को समझने की कोशिश करे तो अहसास होता है कि हमारे इन गांवों में इंसान का प्रकृति के बीच लंबे समय से ऐसा वास्ता रहा है जिसने पर्यावरण संरक्षण का पारिस्थितिक तंत्र को फलने फूलने में मदद की है। ऐसा ही एक प्राकृतिक संसाधन है “भीमल”, “भीमल” का पेड़ ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पाया जाता है जो कि जानवरों के चारे के लिए एक बेहद उपयोगी पेड़ है। इसी पेड़ की टहनियों से रेशा बनाया जाता है। उत्तराखंड के गांव में इसी भीमल के रेशे से सदियों से पारंपरिक रस्सियां बनाई जाती रही है। लेकिन आधुनिकरण के साथ-साथ भीमल से बनने वाला रेशा और उसे बनने वाली रस्सियां कम दिखने लगी है और प्लास्टिक की रस्सियों ने इनकी जगह ले ली है। लेकिन अब कुछ नई तकनीकों के जरिए इसी “भीमल” को नए आकार में और नए उत्पाद में परिवर्तित किया जा रहा है, जो कि उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों के लिए एक बेहद सराहनीय पहल है।

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केवल भीमल ही नहीं उत्तराखंड में और भी कई ऐसे नेचुरल उत्पाद हैं जिनको अभी पहचान मिलनी बाकी है। उत्तराखंड में कई ऐसी प्राकृतिक वनस्पति या फिर उत्पाद इस तरह के पाए जाते हैं जिनके उपयोग की कई अपार संभावनाएं हैं। ऐसा ही एक उत्पाद उत्तराखंड में पाए जाने वाला Nettle fibre या फिर जिसे हम आम भाषा में बिच्छू घास क्या फिर कंडाली कहते हैं वह है। Nettle Grass से ना केवल नेचुरल Nettle fibre बनाया तैयार किया जा सकता है बल्कि इसमें और भी अन्य कई तरह के औषधीय गुण हैं। इसके अलावा पहाड़ी गांव में अक्सर पैदा होने वाला भांग का पेड़ भले ही अपने नाम के अनुसार एक विवादित विषय है लेकिन इस पर अगर संगठित और सुव्यवस्थित शोध किया जाए तो औषधि लेकर नेचुरल फाइबर तक भांग के पेड़ की असीम संभावनाएं हमारे पहाड़ों में छिपी हुई है।

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