उत्तराखंड में 3 महीने के लिए लगाई गई रासुका, हिंसा के मामलों पर सरकार सख्त | National Security Act in Uttarakhand

उत्तराखंड में लगातार बिगड़ रहे लॉ एंड ऑर्डर के मामलों को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश में अगले 3 महीनों के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम यानी रासुका लागू कर दी है और इस तरह के मामलों के लिए जिलाधिकारी को अधिकृत किया गया है।

National Security Act in Uttarakhand extended for next 3 months, District Magistrates have been authorized

उत्तराखंड में सुरक्षा व्यवस्था के लगातार बिगड़ते हालातों को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश में राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत रासुका को अगले 3 महीनों के लिए बढ़ा दिया है। अपर मुख्य सचिव गृह आनंद वर्धन के अनुसार यह कानून प्रदेश में तीन तीन महीनों के लिए लागू किया जाता है लेकिन मौजूदा समय में प्रदेश में कई अपराधिक घटनाएं हो रही है जिनके चलते शासन द्वारा जिलाधिकारी को रासुका के लिए अधिकृत कर दिया गया है और अब प्रदेश में कोई भी व्यक्ति अगर हिंसा में लिप्त पाया जाता है तो उस पर जिलाधिकारी अपने विवेक से रासुका लगा सकता है।

(आदेश की कॉपी)

हाल ही में घटी है ये घटनाएं

बीते रोज रुड़की में धर्मांतरण का बड़ा मामला सामने आया है जहां पर ईसाई मिशनरी में तोड़फोड़ की गई है तो ही इसके अलावा प्रदेश में अन्य कई जगहों पर भी हिंसा के नए मामले देखने को मिले हैं। सोमवार को उधम सिंह नगर में भी एक घटना देखने को मिली है जहां पर भाजपा नेता के वाहन के साथ तोड़फोड़ की गई है और लॉ एंड ऑर्डर को बनाए रखने के लिए गृह विभाग द्वारा यह फैसला लिया गया है।

लखीमपुर खीरी मामले में भी बिगड़ रहे हैं हालात

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में हुए घटनाक्रम के बाद उत्तराखंड में भी हालात लगातार बिगड़ रहे हैं कांग्रेस इस मामले को लगातार बनाने का काम कर रही है सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत लखीमपुर खीरी मामले में देहरादून एसएसपी कार्यालय पहुंचे और जमकर प्रदर्शन किया वहीं इस दौरान हरीश रावत और उनके सैकड़ों समर्थकों ने गिरफ्तारी भी दी।

हड़तालों से भी बिगड़ रहे हालात

प्रदेश में कई कर्मचारी संगठन भी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन पर है तो ही इसके अलावा ऊर्जा कर्मियों ने तो यहां तक चेतावनी दी है कि पीएम मोदी के उत्तराखंड दौरे के दौरान उनका आंदोलन उग्र स्थिति में होगा। राज्य सरकार कर्मचारियों की चेतावनी को लेकर भी सकते में है और आंदोलन के दौरान अगर किसी भी तरह की कोई हिंसा की जाती है तो उस पर लगाम लगाने के लिए जिलाधिकारी को अधिकृत किया गया है कि वह किसी पर भी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून का प्रयोग करते हुए रासुका लगा सकता है।

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