मार्केट में भूसे के हालात बिगड़े तो सख्त हुआ उतराखंड पशुपालन विभाग। कृषि-पशु व्यवस्याय से जुड़े लोग जरूर पढ़े | straw in Uttarakhand

हरियाणा सहित अन्य राज्यों में भूसे की खरीद और बिक्री को लेकर मार्केट में बिगड़े समीकरणों को देखते हुए उत्तराखंड पशुपालन विभाग ने भी बड़ा एक्शन लिया है। जारी हुई नई गाइडलाइन के जरिए भूसे के स्टोर और बिक्री को लेकर कुछ सख्त कदम उठाए हैं और जो उलंघन करेगा उसे इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ेगा।

Guidelines issued regarding straw in Uttarakhand

हरियाणा सहित अन्य राज्यों में  राज्य से बाहर भूसे की बिक्री पर प्रतिबंध

उत्तराखंड पशु पालन विभाग ने उत्तर भारत के राज्यों में पशु चारा के लिए भूसे को लेकर उत्पन्न हुई अप्रत्याशित परिथियों को ध्यान में रखते हुए भूसे के गैर जरूरी स्टॉक और राज्य के बाहर बेचने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है।  गुरुवार को पशुपालन सचिव बी बी आर सी पुरुषोत्तम ने सभी जिलाधिकारियों के लिए इस संबंध में आदेश जारी किए हैं।

Saurabh bahuguna
सौरभ बहुगुणा, कैबिनेट मंत्री उत्तराखंड

उत्तराखंड में कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने लिया एक्शन

पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने बताया कि पशुपालकों द्वारा पशुओं के सूखे चारे के रूप में मुख्य रूप से गेहूँ के भूसे का उपयोग किया जाता है। हर वर्ष अप्रैल माह के दूसरे पखवाड़े और मई माह में गेहूं की फसल की कटाई के बाद भूसा प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होता है और हमेशा इसी समय भूसा न्यूनतम बाजार भाव पर उपलब्ध होता है। उन्होंने बताया उन्नतशील पशुपालकों और निराश्रित यानी अलाभकर गोवंश जो कि किसी उपयोग में नहीं लाए जा सकते हैं, इसे पशुओं को शरण देने के लिए समर्पित गोसदनों द्वारा भी इसी समय अपनी आवश्यकता के अनुरुप ज्यादा से ज्यादा भूसा खरीदा जाता है। लेकिन इस बार हरियाणा सहित अन्य राज्यों ने दूसरे राज्यों को भूसे की आपूर्ति पर रोक लगाने की बज से भूसे की दरों में अप्रत्याशित रूप से अत्यधिक उछाल आ गया है।

पशु चारे के लिए मार्केट में भूसे की कीमत बड़ी 2 गुना से ज्यादा

आपको बता दें की पिछले साल तक सामान्य वर्षों में गेहूं की फसल की कटाई के बाद भूसे का औसतन बाजार भाव लगभग रू.400 से रू. 600रू0 प्रति कुन्तल होता था लेकिन इस बार यह बढ़ाकर रू. 900 से रू. 1,300रू0 प्रति कुन्तल हो गया है। उत्तराखंड़ के पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने बताया की उन्हें कई पशुपालकों ने बताया कि है हरियाणा और अन्य राज्यों द्वारा भूसे पर रोक लगाने के कारण उत्तराखण्ड राज्य में भी भूसे की अत्यन्त कमी हो रही है। संज्ञान में आया है कि कुछ व्यापारियों द्वारा भूसे को बड़ी मात्रा में अनावश्यक रूप से स्टॉक कर के ब्लैक करने की प्लानिग की जा रही है जो कि प्रदेश की कृषि उपज और किसानों के लिए बड़ी मुसीबत का सबब बन सकता है। लेकिन उन लोगों की इस प्लानिंग पर पानी फेरते हुए सौरभ बहुगुणा ने भूसे की ब्लैक मार्केट को लेकर तगड़ा एक्शन लेते हुए ये आदेश जारी किए है।

उत्तराखंड में पशुचारा/भूसे को लेकर दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 144 के तहत जारी गाइडलाइंस

  • -भूसा को ईंट भट्टा एवं अन्य उधोगों में इस्तेमाल ना किया जाय एवं इस हेतु इन उधोगों को भूसा विक्रय पर आगामी 15 दिन तक रोक लगायी जाये।
  • -भूसा विक्रेताओं द्वारा भूसे का अनावश्यक भण्डारण एवं काला बाजारी पर रोक लगायी जाये।
  • -जनपद में उत्पादित भूसे को राज्य से बाहर परिवहन पर तत्काल एक पक्ष हेतु रोक लगा दी जाय।
  • -जिलों में पुराली (फसल निकलने के बची घास) जलाने पर तत्काल रोक लगायी जाये।

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