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गुरुवार को मुख्यमंत्री आवास पर हुई कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना को मंजूरी दी गयी।

Cm ghasyari yojna

उत्तराखण्ड राज्य की 70 प्रतिशत से अधिक की आबादी कृषि और पशुपालन व्यवसाय से जुड़ी हुई है। राज्य में संतुलित पशुआहार के साथ-साथ पर्वतीय क्षेत्र में हरे चारे की अत्यधिक कमी को देखते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत द्वारा मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना की शुरुआत की गयी।

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क्या है मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना

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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत द्वारा शुरू की गई सीएम घस्यारी कल्याण योजना के अन्तर्गत उत्तराखण्ड के दूरस्थ ग्रामीण पर्वतीय क्षेत्रों के पशुपालकों को पैक्ड सायलेज, सम्पूर्ण मिश्रित पशुआहार [Total Mixed Animal Ration-TMR] उनके घर-घर तक पहुंचाना है। इस योजना का उद्देश्य एक लाख से अधिक लाभार्थियों को लाभान्वित करना है, जिनमें विशेषकर महिलायें शामिल है, जिनको रियायती दरों पर सायलेज एवं टी०एम०आर० फीड ब्लॉक उपलब्ध करा कर चारा काटने के कार्य से मुक्त किया जाना है। इस योजना से किसानों द्वारा पौष्टिक पशुचारे के उपयोग में वृद्धि होगी एवं पशुओं के स्वास्थ्य और दूध की पैदावार में दोहरा लाम होगा यह योजना सायलेज उत्पादन एवं विपणन सहकारी संघ लिO (SIFED) के द्वारा संचालित की जायेगी जो कि मक्के की संयुक्त सहकारी खेती करायी जाने वाली एम-पैक्स की केन्द्रीय सहकारी संस्था है।

मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना के उद्देश-

  • >चारा काटने के लिए जंगल में जाने से महिलाओं को होने वाली कठिन परिस्थितियां का निवारण करना।
  • > चारा काटने में लगी हुई ग्रामीण पर्वतीय महिलाओं के कार्यबोझ, दुर्घटना सम्बन्धी
  • >परेशानियों एवं अनुत्पादक अम से बचाव । > फसल के अवशेषों और फॉरेंज (Forage) को वैज्ञानिक संरक्षण द्वारा राज्य में चारें की कमी को दूर करना
  • > फसल के अवशेषों को जलाने के कारण होने वाले पर्यावरणीय दुष्परिणामों को कम करना।
  • > पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार और दूध की पैदावार में वृद्धि करके कृषकों की आय में बढोत्तरी करना।
  • > प्रस्तावित योजना में राज्य के कृशक लाभार्थियों / पधुपालकों को सायलेज/
  • >टी0एम0 आर0/चारा ब्लॉक रियायती दर पर उपलब्ध कराया जायेगा।
  • >इस योजना के तहत लगभग 2000 से अधिक कृषक परिवारों को उनकी 2000 एकड़ से अधिक भूमि पर मक्का की सामूहिक सहकारी खेती से जोडा जायेगा।
  • > वित्तीय वर्ष 2021-22 के दौरान सायलेज एवं टी०एम०आर० हेतु प्रत्येक में 10.000 मैन्टन उत्पादन और आपूर्ति का लक्ष्य रखा गया है।
  • > इस योजना के तहत एक ओर जहां मक्का उत्पादक किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाये जाने की व्यवस्था की गई है, उसके साथ ही राज्यान्तर्गत ही सम्पूर्ण मूल्य श्रृंखला (Complete Value Chain ) स्थापित कर पशुपालकों को गुणवत्तायुक्त सायलेज/टी०एम0आर उपलब्ध होगा एवं पर्वतीय महिलाओं के कन्धों से घास के गट्ठर का बोझ भी उतारा जा सकेगा।

योजना के लिए बजट –

उक्त प्रस्तावित योजना राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना NCDC द्वारा सहायतित के माध्यम से संचालित की जानी हैं, जिसके उत्पादन इकाई की कुल परियोजना लागत पर होने वाला पूंजीगत व्यय 19 करोड 6 लाख 50 हजार मात्र है जिसमें से सिविल इन्फ्रास्ट्रक्चर और प्लांट एण्ड मशीनरी और अन्य व्यय कार्यशील पूंजी को छोड़कर 1306.50 लाख आकलित की गई है। राज्य सरकार द्वारा इसके 50 प्रतिशत का मात्र एक बार पूंजीगत अनुदान उपलब्ध कराये जाने पर सायलेज उत्पादन एवं विपणन सहकारी संघ लि0 को योजना को स्वाश्रयी बनाने में सुगमता होगी, शेष धनराशि की व्यवस्था राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना के प्रावधानों के अन्तर्गत वित्तीय सहायता के रूप में प्राप्त की जायेगी।